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प्रगतिशील रुदिवादि अभिवृति मापनी ,B.ed 1st year notes file pdf in hindi 2020 , B.ed notes in hindi ,b.ed all files in hindi

 B.ed 1st year notes pdf link  प्रगतिशील - रुदिवादि अभिवृति मापनी

ASSESSMENT FOR LEARNING FILE PDF B.ED 2ND YEAR IN HINDI(अधिगम के आंकलन फाइल पीडीएफ लिंक बी.एड द्वितीय वर्ष हिंदी में) TOPICS :- परीक्षण की विश्वसनीयता , पद विश्लेषण , सांख्यिकी तकनीकी के कक्षा कक्ष निहितार्थ

अधिगम  के लिए आंकलन की  बी.एड द्वितीय वर्ष की फाइल का पी डी एफ लिंक नीचे दिया गया है |                          आप यहाँ से फाइल को डाउनलोड कर सकते हैं |                                           TOPICS                             परीक्षण की विश्वसनीयता                              पद विश्लेषण                              सांख्यिकी तकनीकी के कक्षा कक्ष निहितार्थ                        ASSESSMENT FOR LEARNING FILE PDF LINK                       प्रगतिशील - रुदिवादि अभिवृति मापन...

B.Ed 1st Year psychology file pdf link in hindi ( बी.एड प्रथम वर्ष मनोविश्लेषणात्मक फाइल हिंदी में) Topic--- Meaning of interest प्रकरण---- अंतर्मुखी - बहिर्मुखी परीक्षण फाइल in hindi pdf link

बी.एड प्रथम वर्ष मनोविश्लेसणात्मक फाइल pdf link TOPIC - intoversion - extroversion testing file pdf link अंतर्मुखी - बहिर्मुखी परीक्षण फाइल  पी. डी. एफ. लिंक बी.एड  प्रथम वर्ष (B.ED 1ST YEAR) प्रगतिशील - रुदिवादि अभिवृति मापनी

B.Ed 1st Year psychology file pdf link in hindi ( बी.एड प्रथम वर्ष मनोविश्लेषणात्मक फाइल हिंदी में) Topic--- Meaning of interest प्रकरण---- रुचि का अर्थ ( रुचि परीक्षण )

  B.Ed 1st Year Psychology File pdf in hindi  ( बी.एड प्रथम वर्ष मनोविश्लेषणात्मक फाइल पी. डी. एफ. )  Topic--- Meaning of interest प्रकरण---- रुचि का अर्थ      ( रुचि परीक्षण )  प्रगतिशील - रुदिवादि अभिवृति मापनी

विषयों एवं विद्यालयी विषयों की समझ (अध्ययन विषयों के अन्य प्रकार) :- मिश्रित अध्ययन विषय (Fused Discipline), विशुद्ध अध्ययन विषय (Pure Discipline) , (discipline and understanding subjects:- types of understanding discipline and school subjects :- Fused Discipline ,Pure Discipline) in hindi b.Ed 1st year code - 105

मिश्रित अध्ययन विषय (Fused Discipline) :- समाजिक जीवन की बढ़ती हुई जटिलताओं ने एक तरफ तो विशिष्टीकरण को बढ़ावा दिया जिसके परिणामस्वरूप ऐसे विशेषज्ञों की संख्या में वृद्धि होती चली गई जो न केवल एक क्षेत्र विशेष बल्कि उसकी भी किसी एक विशिष्ट छोटी इकाई के सूक्ष्म अध्ययन में जुट गए जबकि दूसरी तरफ विभिन्न क्षेत्रों मे कार्यरत समस्त व्यक्तियों को अपने सामान्य जीवन के लिए अधिक से अधिक विविध ज्ञान प्राप्त करना अनिवार्य होता चला गया।           इस समस्या समाधान के उद्देश्य के परिणामस्वरूप विद्यालयों में अनिवार्य सामान्य पाठ्यचर्या के विषयों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि होती चली गई जिससे पाठ्यचर्या बोझिल हो गई। इससे एक जटिल स्थिति उत्पन्न हो गई क्योंकि किसी भी विषय को बिना उसकी उपादेयता कम किए पाठ्यचर्या से निकाल पाना सम्भव नहीं लगता था।                                  इस जटिल स्थिति से निपटने के लिए शिक्षाविदों एवं विषय-विशेषज्ञों ने सभी दृष्टिकोणों से विश्लेषण करने के पश्चात् यह निष...

विषयों एवं विद्यालयी विषयों की समझ (अध्ययन विषयों के अन्य प्रकार):- समेकित अध्ययन विषय (Integrated Discipline), सुसम्बद्ध अध्ययन विषय (Correlated Discipline) , (discipline and understanding subjects:- types of understanding discipline and school subjects :- Integrated Discipline, Correlated Discipline ) in hindi b.Ed 1st year code - 105

(5.) समेकित अध्ययन विषय (Integrated Discipline) :- गेस्टाल्टवादियों के अनुसार अमेरिका विद्यालयों में एकीकृत पाठ्यचर्या का विकास हुआ।एकीकृत पाठ्यचर्या एकीकरण के सिद्धान्त पर आधारित है जिसके अनुसार कोई विचार एवं क्रिया तभी प्रभावशाली तथा उपयोगी होती है जब उसके विभिन्न भागों या पक्षों में एकता होती है। एकीकृत पाठ्यचर्या वह पाठ्यचर्या है जिसमें पाठ्यचर्या के विभिन्न विषयों में एकता हो साथ ही साथ समस्त विषय एक दूसरे से इस प्रकार सम्बन्धित होते कि वे एक-दूसरे के लिए बाधक न होकर ज्ञान प्राप्ति में सहायक हो। एकीकृत पाठ्यचर्या में यह प्रयास किया जाता है कि सभी पाठ्य विषयों के अध्ययन सामग्री में सह-समबन्ध हो एवं इस पाठ्य सामग्री का जीवन की वास्तविक परिस्थितियों में भी सह-सम्बन्ध हो। बालक को विभिन्न विषय नहीं पढ़ने पड़ते मात्र अपनी रुचि के विषय ही पढ़ने होते हैं। शिक्षा का उद्देश्य बालकों को सभी तरह के ज्ञान से परिचित कराना है। यह उद्देश्य विषयों को पृथक-पृथक (अलग-अलग) रूप में पढ़ाने से पूर्ण नहीं हो सकता अर्थात् यह कार्य तभी सम्पन्न हो सकता है जब विषयों को एक-दूसरे से सम्बन्धित करके पढ़ाया जाए।...

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मूल तत्त्व (Fundamental Elements/Main theme of National Education Policy) in hindi.... Understanding Discipline And School Subjects CODE-105 in hindi

  राष्ट्रीय  शिक्षा नीति के मूल तत्त्व (Fundamental  Elements of National Education Policy) राष्ट्रीय शिक्षा नीति 1986 के मूल तत्त्व इस प्रकार हैं- 1) पूरे देश में 10+2+3 शिक्षा संरचना लागू की जाएगी। 2) प्राथमिक शिक्षा 14 वर्ष की आयु तक निःशुल्क एवं अनिवार्य उपलब्ध कराई जाएगी। 3) प्राथमिक शिक्षा में अपव्यय (wastage धन व्यर्थ करना अर्थात् प्रवेश लेने के बाद विद्यालय न जाना) पर रोक लगाई जाएगी। 4) स्त्री शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए स्त्री निरक्षरता उन्मूलन (Eradication of illiteracy अर्थात् अनपढ़ता को जड़ से उखाड़ देना) तथा व्यावसायिक व तकनीकी प्रशिक्षण पर बल दिया जाएगा। 5) अल्पसंख्यकों की शिक्षा पर गुणात्मक और सामाजिकता की दृष्टि से विशेष ध्यान दिया जाएगा। 6) विकलांगों की शिक्षा के लिए विशेष प्रयास किए जाएंगे। 7) गति निर्धारक विद्यालय प्रतिभाशाली बच्चों के विकास के लिए खोले जाएंगे। 8) उच्च माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक पाठ्यक्रम (जिस से बच्चे स्वयं अपने पैरोंपर खड़े होकर अपना भविष्य बना सकें) उपलब्ध कराया जाएगा। 10) कार्यानुभव को प्रत्येक स्तर की शिक्षा पर अनिवार्य किया ...

विषयों एवं विद्यालयी विषयों की समझ(अध्ययन विषयों की संस्तुति/सिफारिशें RECOMMENDATION OF DISCIPLINES) कोठरी आयोग

कोठरी आयोग (KOTHARI COMMISSION)  :- स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात् गठित "विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग” तथा “माध्यमिक शिक्षा आयोग" ने उच्च शिक्षा तथा माध्यमिक शिक्षा की समस्याओं का अध्ययन करके उनमें सुधार तथा शिक्षण के पुनर्गठन के सम्बन्ध में अपने सुझाव दिए। उनमें से कुछ सुझावों को सरकार ने क्रियान्वित किए जाने का आदेश दिया परन्तु इन सबसे वह प्राप्त नहीं हो सका जो हम प्राप्त करना चाहते थे। इसीलिए भारत सरकार ने सम्पूर्ण भारत में एक समान शिक्षा नीति तथा शिक्षा के विषय में सोचने-समझने के उद्देश्य से एक नए शिक्षा आयोग को गठन करने का विचार किया। इस विचार के फलस्वरूप भारत सरकार ने 14 जुलाई, 1964 को “भारतीय शिक्षा आयोग' का गठन किया। इस आयोग के अध्यक्ष विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. डी.एस. कोठारी थे। इसलिए इस आयोग को अध्यक्ष के नाम पर “कोठारी आयोग' भी कहा जाता है। आयोग का उद्घाटन 2 अक्टूबर 1964 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में किया गया। इस आयोग में कुल 17 सदस्यों ने भाग लिया जिसमें 6 विदेशी विशेषज्ञ थे, उस समय उपस्थित भारतीय राष्ट्रपति डॉ. एस राधाकृष्णन ने अपनी...

विषयों एवं विद्यालयी विषयों की समझ (अध्ययन विषयों के अन्य प्रकार) बहु अध्ययन विषय, ट्रांस अध्ययन विषय (discipline and understanding subjects:- types of understanding discipline and school subjects :- multi-discipline, trans- discipline) in hindi b.Ed 1st year code - 105

बहु अध्ययन विषय (Multi-Discipline) बहुअध्ययन विषय (Multi Discipline) का ज्ञान एक से अधिक शैक्षिक विषयों एवं व्यवसायों का संयुक्त संगठन है। यह परियोजना विभिन्न शैक्षिक विषयों तथा व्यवसायों के लिए बनाई जाती है। इसमें सभी लोग एक साथ एक सामान्य चुनौती से जुड़े होते हैं। बहुविषयी व्यक्ति विभिन्न शैक्षिक विषयों में एक से अधिक डिग्री रखता है। वह अतिरिक्त समय में(Overtime) कार्य करता है| वह किसी शैक्षिक विषय में कभी अधिक कार्य करता है और किसी शैक्षिक विषय में कम। वह कई कार्यों को पूरा करके समुदाय में अपने ज्ञान का वितरण करता है। किसी एक व्यक्ति के लिए कई कार्य करना एक प्रकार से काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है क्योंकि एक व्यक्ति एक कार्य को ही ठीक प्रकार से कर पाता है। बहुविषयी समुदाय अधिक कठिन तथा प्रभावशाली होते हैं।                                               ऐसे बहुत से उदाहरण है जिसमें एक व्यक्ति विभिन्न शैक्षिक विषयों में पारंगत होते हैं। बहुविषयी उपागम(content) भविष्य को नवीन आ...

विषयों एवं विद्यालयी विषयों की समझ (अध्ययन विषयों के प्रकार) मूल अध्ययन विषय (कोर अनुशासन),अंतः विषयक अध्ययन विषय (अंतःविषय अनुशासन), अंत: विकास का विकास (अंतःविषय अनुशासन का विकास),

अध्ययन विषयों के प्रकार   परिचय : - अध्ययन विषयों को कई वर्गों में बांटा जाता है जिससे प्रत्येक विषय का सरलता से अध्ययन किया जा सकता है। अध्ययन विषयों के वर्गीकरण में कई विषयों को स्थान दिया जाता है जो निम्नलिखित हैं- 1) मूल अध्ययन विषय (कोर अनुशासन),  2)  अंतः  विषय अध्ययन विषय (इंटर-डिसिप्लिन),  3) बहुविषय अध्ययन विषय (बहु-अनुशासन),  4) ट्रान्सविषयी (ट्रांस-डिसिप्लिन),  5) स्टैडिट अध्ययन विषय (एकीकृत अनुशासन),  6) गहन अध्ययन विषय (सहसंबद्ध अनुशासन),  7) मिश्रित अध्ययन विषय (फ्यूजड डिसिप्लिन),  8) विशुद्ध अध्ययन विषय (शुद्ध अनुशासन),  1) मूल अध्ययन विषय (कोर अनुशासन) : - सामाजिक जीवन की स्वतंत्रता और विशिष्टीकरण की प्रवृत्ति के परिणामस्वरूप सभी व्यक्तियों को सामान्य जीवन के लिए अधिकाधिक ज्ञान की आवश्यकता ने मुख्य विषयों को जन्म दिया। कोर पाठ्यचर्या वास्तव में पूर्व विवरण सामान्य पाठ्यचर्या का ही दूसरा नाम है। इसके अन्तर्गत उस ज्ञान और अनुभव को समाहित किया जाता है जो सभी छात्रों के लिए (चाहे वे किसी भी क्षेत्र मे प्रवेश करना चाहते...

विषयों एवं विद्यालयी विषयों की समझ (अध्ययन विषयों का इतिहास,महत्व) history And importance of dicipline in hindi

अध्ययन विषयों का इतिहास (History of Disciplines) :- विभिन्न विषयों के विकासवादी इतिहास का पता लगाना आसान काम नहीं है। अध्ययन विषय विकसित होते हैं एवं उनमें पर्याप्त अन्तर भी हैं। अध्ययन विषय का विकास ज्ञान के साथ शुरू होता है जो किसी विशेष सांस्कृतिक परिवेश के व्यक्तिगत अनुभव के रूप में मानव मन और पर्यावरण के बीच सामाजिक अनुभव या बातचीत के माध्यम से विकसित होता है। इसके उद्देश्य संकल्पनात्मक रूप में, सभी सांस्कृतिक और अनुभवात्मक अवरोधों को काटता एवं इस प्रकार अध्ययन विषय के रूप में तैयार हो जाता है। अध्ययन विषय शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम सन् 1231 ई. में फ्रान्स के पेरिस विश्वविद्यालय में किया गया। उस समय चार प्रमुख विषयों का अध्ययन कराया जाता था। ये विषय निम्नलिखित थे- 1) धर्मशास्त्र (Theology)-इसके अन्तर्गत प्रमुख रूप से दो विषयों, दर्शन शास्त्र एवं   मनोविज्ञान का अध्ययन कराया जाता था। 2) कैनन विधि (Canon Law)-इसके अन्तर्गत अर्थशास्त्र एवं मानविकी का अध्ययन कराया   जाता था। 3) कला (Art)-कला के अन्तर्गत अभिनय एवं प्रदर्शन कला का अध्यापन किया जाता था। 4) औषधि (Medicine)-औषधि वि...

विषयों एवं विद्यालयी विषयों की समझ (अध्ययन विषय (डिसीप्लीन) का अर्थ एवं परिभाषाएँ) definition and meaning of understanding discipline and school subjects in hindi

अध्ययन विषय (डिसीप्लीन) का अर्थ एवं परिभाषाएँ   (Meaning and Definitions of Discipline) :- Discipline अंग्रेजी भाषा का शब्द है जिसकी उत्पत्ति लैटिन शब्द 'डिसाइपुलस' (Discipules) शब्द से हुई है जिसका हिन्दी में अर्थ है 'सीखना' या 'आज्ञापालन (To learn or obedience) | कुछ शिक्षाविदों का मत है कि Discipline शब्द अंग्रेजी भाषा के डिसाइपिल शब्द से उत्पन्न  हुआ है और 'डिसाइपिल' का अर्थ है 'शिष्य' या छात्र (Pupil) | Discipline शब्द की उत्पत्ति Disciplina से भी मानी जाती है जिसका अर्थ है- अध्यापन (Teaching)। The term 'discipline' originates from the english words disciples, which means pupil and disciplina which means teaching. वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र को अध्ययन विषय (Discipline) के रूप में व्यक्त किया जाता है।अध्ययन विषय वस्तुओं तथा घटनाओं के किसी विशिष्ट क्षेत्र सम्बन्धी ज्ञान का संगठन है। इन वस्तुओं तथा घटनाओं के अन्तर्गत वे तथ्य, प्रदत्त, पर्यवेक्षण,अनुभूतियाँ आदि सम्मिलित रहती हैं जो उस ज्ञान के आधारभूत घटकों को निर्मित करते हैं। कोई ज्ञान क...

विषयों एवं विद्यालयी विषयों की समझ( मूल्य शिक्षा का अर्थ, परिभाषा, उद्देश्य, आवश्यकता) Meaning and Definitions of Values

मूल्यों का अर्थ एवं परिभाषाएँ(Meaning and   Definitions of Values) 'मूल्य' सहित जीवन ही अर्थपूर्ण होता है, मूल्यरहित जीवन का कुछ भी महत्त्व नहीं होता है। जो मनुष्य मूल्यों को महत्त्व देता है, वो समाज में महत्त्वपूर्ण स्थान रखता है। ऐसा व्यक्ति समय को महत्त्व देता है, तथा वह प्रत्येक पल का भरपूर आनन्द लेता है एवं उसका भरपूर उपयोग करता है। अतः प्रत्येक वस्तु जिसका महत्त्व होता है, उसे हम मूल्य कहते हैं।                                               सत्य, ईमानदारी, अच्छाई आदि 'मूल्य' हैं, जबकि झूठ, बेईमानी, आदि 'अवमूल्य' हैं। Value शब्द का उद्भव 'Valure' से हुआ है जो कि लैटिन भाषा का शब्द है, जिसका तात्पर्य महत्त्व, उपयोगिता अथवा वांछनीयता से लगाया जाता है। मूल्य समाज में विभिन्न आदर्शों, प्रतिमानों के रूप में समाज को उचित दिशा निर्देशन प्रदान करते हैं।समाज में व्याप्त मूल्य एवं आदर्श सामाजिक व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण की दृष्टि से वांछनीय एवं उपयोगी हैं। मूल्य ...

विद्यालयी पाठ्यचर्या,पाठ्यक्रम,पाठ्यसामग्री का अर्थ एवं परिभाषाएँ (meaning and definitions of curriculum, syllabus and content) in language across the curriculum, understanding discipline and school subjects in hindi

विद्यालयी पाठ्यचर्या का अर्थ एवं परिभाषाएँ(Meaning and Definitions of School Curriculum) :- पाठ्यचर्या अं ग्रेजी भाषा के करीकुलम (Curriculum) शब्द का हिन्दी रूपान्तर है। करीकुलम शब्द लैटिन भाषा से लिया गया है। यह शब्द ' कुरैर ' से निर्मित हुआ है। कुरैर का अर्थ है- दौड़ का मैदान । अतः पाठ्यचर्या वह दरिया है जिसे किसी व्यक्ति को अपनी मंजिल तक पहुँचने के लिए पार करना होगा। इसे वह साधन भी कहा जा सकता है जिसे जीवन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए उपयोग में लाया जाता है। पाठ्यचर्या को विभिन्न विद्वानों ने इस प्रकार परिभाषित किया है- बबिट के अनुसार, "उच्चतर जीवन के लिए प्रतिदिन और 24 घण्टे की जा रही समस्त क्रियाएँ पाठ्यचर्या के अन्तर्गत आ जाती हैं।" ड्यूवी के अनुसार, “सीखने का विषय या पाठ्यचर्या पदार्थों, विचारों और सिद्धान्तों का चित्रण है जो निरन्तर उद्देश्यपूर्ण क्रियान्वेषण के साधन या बाधा के रूप में आ जाते हैं।" राबर्ट एम.डब्ल्यू. ट्रेवर्स के अनुसार, "एक शताब्दी पूर्व पाठ्यचर्या की संकल्पना उस पाठ्यसामग्री का बोध कराती थी जो छात्रों के लिए निर्धारित की ...

विषयों एवं विद्यालयी विषयों की समझ(अध्यापक शिक्षा से संबंधी सुझाव, अध्यापक के दोष, अध्यापक शिक्षा के दोषों को दूर करने के लिए सुझाव, व्यावसायिक शिक्षा की उन्नति (Progress of Professional Education), शिक्षक प्रशिक्षण की अवधि (Time Period of Teacher's Training), प्रशिक्षण संस्थाओं की उन्नति (Progress of Training Institutions),

  अध्यापक शिक्षा से संबंधी सुझाव  : - शिक्षा की गुणात्मक उन्नति हेतु अध्यापक की व्यवसायिक शिक्षा का ठोस कार्यक्रम अनिवार्य है।  इस महत्व को ध्यान में रखते हुए आयोग ने अध्यापक शिक्षा के दोष तथा उसमें सुधार के लिए  निम्नलिखित सुझाव दिए गए :-   अध्यापक के दोष :- आयोग ने अध्यापक शिक्षा के निम्नलिखित दोष बताए हैं- i) प्रशिक्षण संस्थाओं का कार्य निम्न कोटि का है। ii) प्रशिक्षण संस्थाओं में योग्य अध्यापकों की कमी है। iii) पाठ्यक्रम में सजीवता, और वास्तविकता का अभाव है। iv) शिक्षण विधियों में नवीनता नहीं है। v) शिक्षकों को दिया जाने वाला प्रशिक्षण परम्परागत है। vi) प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक प्रशिक्षण देने वाल संस्थाएँ  का इन विद्यालयों की दैनिक  समस्याओं से कोई  संबंध नहीं  है। vii) माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक प्रशिक्षण देने वाली      संस्थाओं का इन विद्यालयों की दैनिक समस्याओं से कोई        संबंध नही है।   अध्यापक शिक्षा के दोषों को दूर करने के लिए सुझाव :- अध्यापक शिक्षा के दोषों को दूर करने के लि...

शिक्षा में स्मार्ट फोन का प्रयोग हिंदी में (use of mobile phone in Education in hindi), फोन का use education मे in hindi in ict

जैसा कि नाम से स्पष्ट है कि ऐसा फोन जो स्मार्ट तरीके से काम करता है। एेसा स्मार्ट तकनीकी तरीका जिसके कारण कोई भी व्यक्ति अधिक से अधिक कार्यो को करने के लिए सबसे पहला विकल्प स्मार्ट मोबाइल को समझता है।        दिन-प्रतिदिन हो रहे तकनीकी परिवर्तनों ने वर्तमान में इंटरनेट व स्मार्ट फोन दोनों ने मिलकर केवल फोन ही स्मार्ट नही बनाया है। बल्कि उसे प्रयोग करने वाला व्यक्ति भी आजकल स्वयं को स्मार्ट व्यक्ति समझने लगा है। स्मार्ट फोन की सहायता से शिक्षा, व्यापार व एक-दूसरे से संचार आदि में सहायता मिलती है।अपने फोन को इंटरनेट से कनेक्ट करके प्रत्येक व्यक्ति दुनिया के किसी भी कोने में सम्पर्क स्थापित कर सकता है। ठीक इसी प्रकार स्मार्ट फोन शिक्षा में भी कार्य करता है। शिक्षा प्राप्ति के लिए स्मार्ट फोन के माध्यम से दूरस्थ शिक्षा प्राप्त की जा सकती है। ऐसे तकनीकी साधनों (स्मार्ट फोन) के कारण दूरस्थ शिक्षा का विकल्प उपलब्ध हो सका है। ये विकल्प निम्न हैं:- (1.) ऑनलाइन जानकारी, (2.) मल्टीमीडिया तकनीकी शिक्षा, (3.) ई-लाइब्रेरी, (4.) ई-शिक्षण, (5.) ई-अनुवर्ग(E- tutorial), (6.) ...

EDU-SAT का अर्थ, आवश्यकता व महत्व

EDU-SAT  का पूरा नाम (Education Satelite) शिक्षा उपग्रह है।भारत में सर्वप्रथम 20 सितम्बर 2004 को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा प्रेक्षपण स्थल सतीश धवन अन्तरिक्ष केंद्र से सफल परीक्षण किया गया। यह ढाई वर्षों में 80,000 रूपये की लागत से बना है। यह 2 टन वाला उपग्रह धरती से 36 हजार किमी की ऊंचाई पर चक्कर काट रहा है। इसकी सहायता से शिक्षक व विद्यार्थी दुनिया के किसी भी कोने में एक आभासी कक्षा के अन्तर्गत शैक्षिक क्रिया सरलता से कर सकते हैं। भारत में 1975 से 2020 तक कई उपग्रहों का ISRO द्वारा सफल परीक्षण किया गया परन्तु 2004 में ऐडू-सैट पहला ऐसा शिक्षा से सम्बन्धित भारत का उपग्रह है जिसने दुनिया के किसी भी कोने में बैठे दो तरफा शैक्षिक संचार को सफल बनाया है। अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) भारत की एकमात्र अंतरिक्ष एजेंसी है। इसरो का मुख्यालय बैंगलोर में है। इसरो के वर्तमान अध्यक्ष एएस किरण कुमार है। 17 जनवरी 2020 को जीसैट-30 फ्रेंच गुआना से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया । यह उपग्रह ISRO द्वारा  INSAT-4A के प्रतिस्थापन के रूप में लॉन्च किया गया। यह इसरो द्वारा लॉन्च किया गया 41 ...