भारत में अभिक्रमित अनुदेशन का इतिहास (History of Programmed Instruction in India in ict) हिंदी में


भारत में अभिक्रमित अनुदेशन का इतिहास (History of Programmed Instruction in India): -

भारत में अभिक्रमित अनुदेशन का इतिहास ज्यादा पुराना नहीं है। सन् 1963 में सेन्ट्रल पैडागोजीकल इन्स्टीट्यूट (C.P.I.) इलाहाबाद में अभिक्रमित अनुदेशन पर तीन दिवसीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया तत्पश्चात् भारत के विभिन्न प्रदेशों में इस विषय पर गोष्ठियों का आयोजन किया गया। सन् 1965 में एन.सी.ई.आर.टी., नई दिल्ली (NCERT, New Delhi) के मनोविज्ञान विभाग द्वारा अभिक्रमित अनुदेशन पर
दो सप्ताह का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। सन् 1966 में NCERT ने अभिक्रमित अनुदेशन पर एक कार्यशाला का आयोजन किया और Indian Association of Programmed Learning (IAPL) का भी गठन किया गया। NCERT ने इस दिशा में अनेक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। सन् 1967 में चण्डीगढ़ में अभिक्रमित अनुदेशन पर
पुनः कार्यशाला का आयोजन NCERT द्वारा किया गया। सन् 1980 के बाद से अभिक्रमित अनुदेशन का अनुप्रयोग व्यापक स्तर पर किया जाने लगा। बड़ौदा यूनिवर्सिटी (C.A.S.E.), मेरठ यूनिवर्सिटी एवं हिमाचल यूनिवर्सिटी में एम.एड, एम
फिल., एवं डॉक्टरेट स्तर के अध्ययन में अभिक्रमित अनुदेशन पर अनुसन्धान कार्यों को अत्यन्त महत्व दिया गया।अभिक्रमित अनुदेशन का प्रयोग रक्षा, परिवार नियोजन तथा बैंक आदि में भी किया जाने लगा। सन् 1984 में NCERT के अन्तर्गत सेन्टर ऑफ ऐजूकेशनल टेक्नोलॉजी (Centre of Educational Technology) की स्थापना की गई
जिसका प्रमुख कार्य अनुदेशन सामग्री का निर्माण करना था। तत्पश्चात् NCERT ने शैक्षिक तकनीकी व अनुदेशन के क्षेत्र में राष्ट्रव्यापी योजनाओं का निर्माण किया।

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